भारतीय इतिहास में पहली बार
एक अमेरीकी राष्ट्रपति का गणतंत्र दिवस की परेड में मुख्य अतिथि के तौर पर भारत
आगमन हो रहा है। अमेरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा इससे पहले भी एक बार भारत आ चुके
हैं। सप्रंग सरकार के शासन काल में ओबामा के भारत आने के बाद से भारत और अमरीका के
संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई। परमाणु अप्रसार संधि, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
तथा अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर अमरीका की सोच स्पष्ट हुई है। चीन के बढ़ते
वर्चस्व को देखते हुए अमरीका के साथ आर्थिक, राजनैतिक तथा कुटनीतिक संबंध बनाने जरुरी हैं। अमरीका वेसे भी सुपर पावर कहलाता है इस बात को
ध्यान में रखते हुए उससे मैत्रीपूर्ण संबंध तथा आपसी सहयोग आवश्यक है। वर्तमान में
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भी इस दिशा में पहल कर रही है। कुछ दिनों
पहले प्रधानमंत्री का अमेरीकी दौरा, अमेरीकी विदेश मंत्री का भारत दौरा तथा अब
अमरीका के राष्ट्रपति का गणतंत्र दिवस की परेड में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना यह
बताता है कि दोनों देश आपसी संबंधों को नए आयाम देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इससे
पहले भी गणतंत्र दिवस की परेड़ मे विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों का बतौर
अतिथि आगमन हुआ है। पर इस बार बराक ओबामा का मुख्य अतिथि होना कई मामलों मे खास
है। ये आगमन न केवल आपसी संबंधों को मधुर बनाने के लिए प्रस्तावित है बल्कि अपने
साथ कई विवादों और मुद्दों को जन्म देनेवाला भी हैं।
हाल के दिनों में अखबारों
में यह खबर प्रमुखता से छापी जा रही है कि बराक ओबामा के भारत आगमन पर सुरक्षा की दृष्टि से तमाम तरह के इंतजामात किए गए हैं। जहां भी ओबामा के रुकने का कार्यक्रम
है वहां सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल के साथ-साथ सामान्य नागरिकों के लिए तमाम
तरह के प्रतिबंध लगाए जाने हैं। मसलन, वो
होटल जहां ओबामा रुकने वाले हैं उसे तीन दिन पहले ही अन्य लोगों के लिए बंद कर दिए
जाएंगे। आसपास के इलाके में भी भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है तथा सड़कों को
भी आम लोगों के लिए बंद कर दिया जाएगा। गणतंत्र दिवस के परेड़ के दौरान भी अमरीकी
राष्ट्रपति के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उनके बैठने के लिए अलग व्यवस्था की
गई है। सुरक्षा कारणों के चलते ओबामा अपनी गाड़ी से परेड़ स्थल तक आएंगे। जबकि
इसके पहले तक ऐसी परंपरा थी कि मुख्य अतिथि राष्ट्रपति के साथ गाड़ी में आते थे।
राजपथ के पूरे इलाके को दो दिन पहले ही सील कर दिया जाएगा। पूरी दिल्ली में 15000
सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। ओबामा के साथ उनका पूरा दस्ता भी आ रहा रहा है
जिसमे कि विमानों , गाड़ीयों तथा अन्य सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। पूरे प्रतिनिधि
दल के भी रहने का इंतजाम पंचसितारा होटलों में किया जा रहा है. कुछ दिनों पहले आई
एक अमेराकी जांच समिति के रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि दिल्ली में प्रदुषण के
स्तर को देखते हुए ओबामा का अधिक देर तक खुले में बैठना भी हानिकारक है। यह उनके
फेफडों को नुकसान पहुंचा सकता है। राष्ट्रपति के प्रोटोकाल के अनुसार वे कहीं भी
एक स्थान पर 20 मिनट से ज्यादा देर तक नहीं बैठ सकते हॆं। उन्हें अपना स्थान बदलते
रहना होगा जो कि गणतंत्र दिवस की परेड़ में संभव नहीं है। सुरक्षा करणों के चलते
अमरीकी सुरक्षा एजेंसियों ने यह मांग भी है कि राजपथ को नो फ्लाइंग जोन बनाया जाए।
दिल्ली के बाद ओबामा का कार्यक्रम आगरा में ताजमहल के दीदार का भी है। उसके लिए भी
सुरक्षा के चौकस इंतजाम किए गए हैं. सबसे बड़ा कदम तो यमुना एक्सप्रेसवे को दो दिन
पहले से ही बंद किए जाना है। आगरा पहुंचने बाद भी उसी तरह की व्यवस्था की गई है कि
जैसी की राजधानी दिल्ली में है। इस प्रकार अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा के भारत आगमन
पर सुरक्षा के अभूतपूर्व उपाय किए गए हैं। आज तक भारत के इतिहास में किसी
राष्ट्रप्रमुख के आगमन पर ऐसी व्यवस्था नहीं की गई है। हालांकि इसके पहले भी ओबामा
के भारत आने पर ऐसे सुरक्षा उपाय किए गए थे पर गणतंत्र दिवस के समय ऐसा कभी नहीं
हुआ है।
ओबामा का भारत आगमन कई
मायनों में महत्वपूर्ण है। ओबामा के भारत आने पर दोनो देशों के बीच आर्थिक तथा
कुटनीतिक सहीत कई मसलों पर सहमती के आसार हैं। मल्टी ब्रांड रिटेल से लेकर सैन्य
खरीदारी आपसी समन्वय के बगैर असंभव है। चीन
के बढ़ते प्रभाव को रोकना भी अमरीका के साथ हाथ मिलाने से ही संभव है। इसमें कोई
दो राय नहीं है कि अमरीका के साथ बेहतर संबंध हमारी जरुरत में शामिल है। पर इसका
मतलब यह नहीं है कि ओबामा को मुख्य अतिथि के रुप में बुलाकर सुरक्षा के नाम पर
अपना मजाक बनवाया जाए। अमरीकी सुरक्षा एजेंसियों के नखरे इतने सारे हैं कि भारत
में उनकी भरपायी नहीं की जा सकती। इस बात से कोई इन्कार नहीं कर सकता है कि ओबामा
आतंकियों की हिट लिस्ट में शामिल हैं। साथ ही साथ भारत की सुरक्षा व्यवस्था के
हालात भी किसी से छिपे नहीं हैं। ये सारी बाते जानते हुए भी ओबामा को गणतंत्र दिवस
के समय आमंत्रित करना कहीं से भी जायज नहीं लगता। उन्हें कभी और भी बुलाया जा सकता
था। जब आपकी सुरक्षा ही संदिग्ध हो तब आप ओबामा को सुरक्षा कैसे प्रदान करेगे।
ओबामा का अपना प्रोटोकाल है जिसका पालन भारत के वर्तमान हालात मे संभव नहीं है। इस
प्रकार से हम अपना मजाक नहीं बना रहें हैं तो और क्या?
ओबामा का भारत आगमन भारतीय
सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ जनता के लिए भी सिरदर्द साबित हो रहा है। ओबामा की
आगवानी में सुरक्षा के नाम पर एक तो जनता के पैसों को पानी की तरह बहाया जा रहा है
साथ ही साथ उसपर तमाम तरह के प्रतिबंध भी लाद दिए गए हैं। मौर्या शेरेटन होटल और
आसपास के इलाकों को तीन दिन पहले ही आम जनता के लिए बंद किए जाना परेशानी तो आम
जनता के लिए ही है। राजपथ को भी दो दिन पहले ही बंद किया जाना यही दर्शाता है।
यमुना एक्सप्रेसवे का भी दो दिन पहले बंद किये जाने से आम यातायात पर भारी असर
पड़ेगा। जब इतनी बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती ओबामा की सुरक्षा के लिए होगी
तब आम जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारियां कौन लेगा? जबकि पहले ही गणतंत्र दिवस के दिन आतंकी हमलों
की आशंका जतायी जा चूकी है। जरुरी नहीं है कि कोई भी घटना परेड़ के दौरान राजपथ के
पास ही हो। दिल्ली जैसे शहर में कहीं भी आतंकी हमला हो सकता है और आतंकी अपनी
कोशिश में सफल हो जाएंगे। भारत का मजाक भी देश के लोगों के साथ मजाक ही तो है। इस
प्रकार हम कह सकते हैं कि ओबामा का भारत आगमन यदि किसी मामले में सफल हो भी जाता
है फिर भी भारत की प्रतिष्ठा पर तो आंच आएगी ही। राष्ट्रमंड़ल खेलों के दौरान भी
ऐसा ही हुआ था। आमरीका के साथ संबंध बनाने की कीमत पर देश के साख के साथ मजाक
भविष्य में दीर्धकालिक असर ड़ालेगा। जनता तो ऐसे झेलने कीआदी हो गई है। हां जनता के लिये एक कि बहुत ही अच्छी खबर है कि अब जो सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने हैं उसकी सुरक्षा के लिए मददगार साबित होंगे. ये अलग बात है है कि अभी तक सुरक्षा की कोई ऐसी व्यवस्था नहीं थी.
हमारे लिए मेहमान देवता के समान होता है. मेहमान के आतिथ्य के लिए हम ये भी ख्याल करना भूल जाते हैं कि हमारी हालत और संसाधन पर्याप्त हैं कि नहीं. ये हमारी परंपरा भी है और खासियत भी. पर जब मेजबानी में कोई हमारा मखौल उड़ाये तब ऐसे आतिथ्य का क्या औचित्य है.
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