शनिवार, 3 जनवरी 2015

सरकार आई है!!

देखो ना सरकार आई है
मंगलयान पर सवार आई है
जनधन अपार लाई है
स्वच्छता की बयार लाई है
हमारी-आपकी बहार आई है!

देखो ना सरकार आई है
पर घरवापसी के लिए संघी कार लाई है
अध्यादेशों के साथ हुंकार आई है
योजना को नकार आई है
नए वर्ष के साथ नयी नीति लाई है!

देखो ना सरकार आई है
थोक महंगाई पर लगाम लाई है
पिंजड़े के तोते को बोलना सीखा आई है
भ्रष्टाचार के दीमक के लिए रामबाण लाई है
आपके न्याय की गुहार लाई है!

देखो ना सरकार आई है
मेक इन इंडिया की सौगात लाई है
गंगा के लिए मान लाई है
उद्दयोगपतियों में नई जान लाई है
किसानों के लिए स्वाभिमान लाई है!

देखो ना सरकार आई है
वादों की बऱसात लाई है
काले धन को लाने की ठान आई है
विकास की रफ्तार में धार आई है
जनता का कथित विश्वास साथ लाई है!

पर, देखो ना सरकार आई है
शिक्षा में स्मृति का बहस लाई है
देवों की भाषा को थोप आई है
सिर्फ हिन्दु के लिए नया हिन्दुस्तान लाई है
बाकियों को बदलने की कवायद लाई है!

पर, देखो ना सरकार आई है
रंजीत के जगह अनिल लाई है
पिंजड़े को चूहेदानी में बदल लाई है
पड़ोसी से रिश्ते में दरार लाई है
अमेरिका में झुठ का दहाड़ आई है!

पर, देखो ना सरकार आई है
घर की शांति को भेद आई है
सहारनपूर से चलकर त्रिलोकपूरी में दंगे साथ लाई है
सबके साथ का नारा लाई है
शासन में एकाधिकार लिए आई है!

देखो देखो सरकार आई है
टीवी में छाई है,टीआरपी की लड़ाई है
अखबारों में छायी है, मालिकों की कमाई है
क्या पुरानी ही नया मुखौटा लगाई है
अब समझ लिजिए इसके मन में क्या समाई है!
                              ---- नीरज प्रियदर्शी-------

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