हर मोड़ पर मिलते हैं कुछ चेहरे,
कुछ मुरझाए से तो कुछ उमजाए हुए
कुछ लाजवंती से तो कुछ बेहया
कुछ अनमने से तो कुछ गमजदे से
कुछ तेज लिए तो कुछ खर खाए
हर मोड़ पर मिलते है कुछ चेहरे
एक चेहरे के पीछे दो चेहरे
उन चेहरे मे घुले सूुख-दुख
असमान भावों मे सजे हुए
एक-दुसरे को निहारते चेहरे
मुक बने चेहरे भी सवाल उठाते हैं,
खीज से भरे एक दूसरे को गलियाते हैं
सबकों आगे निकलने की जद होती है
इस कवायद की कोई नहीं हद होती है
फिर भी चेहरे गले लगाते हैं
कभी पास , तो कभी दिल में बसाने की कसम खाते हैं।
ऐसे भी चेहरे आते हैं
जो दिल मे बस जाते हैं
जो आंखों मे चुभ जाते हैं
कोई ताउम्र अपना रहता है
कोई पल भर में ठग लेता है
मुझे हर रोज मिलते हैं ये चेहरे
कभी अपने से लगते हैं तो कभी प्यार के काबिल
कभी दिल में उतर जाते हैं तो कभी अधरों का गुस्सा
हर चेहरा अपना रंगत दिखाता है
कभी संगत पर तरस आता है
कभी सौभाग्यवान होने का सुख दे जाता है।
----नीरज प्रियदर्शी-----
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