बुधवार, 24 दिसंबर 2014

तुम्हारे लिए

आज तुम्हारे लिए लिख रहा हूँ, बस तुम्हारे लिए।
प्यार के लिए, तुम्हारे इकरार के लिए,
जगती रातों के लिए, मखमली बातों के लिए,
अनकहे सपनों के लिए, दिल की खनक के लिए,
तुम्हारे सहारे के लिए, दिखते किनारे के लिए,
जिंदगी की घुट्टी के लिए, अब तक हुई हर त्रुटि के लिए,
बस तुम्हारे लिए लिख रहा हूँ, बस तुम्हारे लिए।
मुझे याद है वो पहला दीदार,
झुकी नजरों और शोखी का वो हार,
चांद रह गया पीछे, जबकि
उसे देखा ता एक नहीं सैकड़ों बार,
टकटकी लगाकर ताकती मेरी वो आँखें,
डर की गिरहों मे बंधा मेरा करार,
फटकार सी लगने वाली तुम्हारी वो बातें,
पर इन कड़वी बातों में छिपा वों कशिश, वो खुमार,
जिन्हें सुन कर खुश हो जाता था हर बार, हर बार।
तुम्हारी गली की नुक्कड़ की उस बैठकी के लिए,
तुम्हारे छत के मुंडेरों पर टिकी उन नजरों को लिए,
दिल की बेचैनी के लिए,
ना हो सकने वाले इजहार के लिए,
घर से किए बहाने के लिए,
तुम्हारी एक झलक पा जाने लिए,
सड़कों पर धूल फांकती उन शामों के लिए,
याद कर तन्हाइ में गुनगुनाने के लिए,
आज तुम्हारे लिए लिख रहा हूँ, बस तुम्हारे लिए।
उस रात की बात बताता हूँ,
जिसे याद कर फिर से उन्हीं यादों मे खो जाता हूँ,
दिल के चितवन मे भौंरें गा रहे थे,
मचलते वो जज्बात सामने आ रहे थे,
नींद को गोली मार हम निशाचर हुए जा रहे थे,
तुम्हें बाहों मे भर लेने को आतुर हुए जा रहे थे,
तुम्हारा वो इजहार, ढ़ाई अक्षरों का वो करार,
पून: कहने को चाहता है दिल एक नहीं सौ बार, हर बार।
दौड़ जिंदगी की शुरु हो गई थी,
मैं कत्थक करने लगा था, तुम मेरी घुंघरु हो गई थी,
अब तो रोज बहाना था,
बेकरारी का नहीं कोई पैमाना था,
जगती रातों के वो अफसाने थे,
तुम्हारे नैन ही अब मयखाने थे,
मुझे नहीं किसी का भान था,
तुम्हारे लिए धड़कता जान था,
पर, तुम्हारे भाई का अभिमान था, बापू का मान-सम्मान था।
उन सवाली रातों के लिए,
विरह की वेदना के लिए,
अकेलेपन के उस दौर के लिए,
तुम्हारी खामोशी और मेरी चुप्पी के लिए,
तुम्हारे आहट के इंतजार के लिए,
आंखों से निकले अश्रु-धार के लिए,
कल्पना में बिखरे अंधियारे के लिए,
आज तुम्हारे लिए लिख रहा हूँ, बस तुम्हारे लिए।
गुड़िया,
तुम्हारे लौट कर आने लिए,
तुम्हारा प्यार नि:स्वार्थ पाने लिए,
तुम्हारे कसमों वादों के लिए,
तुम्हारे सहारे के लिए, जिंदगी के उजियारे के लिए,
तुम्हारे अप्रतिम चाहत के लिए,
अश्रु के उन धारों के लिए,
तुम्हारी नजरों की शोखी के लिए,
चांद के उस पार जाने के लिए,
तुम्हीं में डूब कर मर जाने के लिए,
आज तुम्हारे लिए लिख रहा हूँ, बस तुम्हारे लिए।

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