सोमवार, 7 अप्रैल 2014

।।।। नेता जी! नमस्कार ।।।।।


जाते हो कहाँ यू मुड़ के
इंतजार के बाद आए हो
इस तरह जाइए ना छोड़ के
शिष्टाचार! से याद आए हो

स्मृति मे हो
जब तबकि बार आए थे
कैसी बेचैनी में हो
तबकी तो बहुत बार आए थे

जब  दो चार हुए थे
बीनटोली की नालीयों से
चमरटोली की गलियों से
बाबूओं के चौपाल से
बनियाटोली के मकड़जाल से

जब भावविह्वल हुए थे
बेटियों की दशा पर
वृद्धों की दु्रदशा पर
विद्यालय के खस्ताहाल पर
शौचालय के तरणताल पर

जब वादे किए थे
एडिशन के बल्ब को जलाने का
मारुति की कारों को दौड़ाने का
बच्चों से रोबोट चलवाने का
गरीबों को आवास दिलाने का

जब हुक्म किया था
अस्पताल को नियमित  खुलवाने  का
नदी पर पुल बनवाने का
सामुदायिक भवन निर्माण कराने का
पाठशाला को उन्नत बनाने का

जब गौरवान्वित किए थे
मातृशक्ति पर
अपनी देशभक्ति पर
क्षेत्र की पहली रेल पर
जेल से हुई अपनी बेल पर

जब आशान्वित किए थे
सुशासन की  महिमा बताकर
विकास की संरचना समझाकर
भ्रष्टाचार की भरत्सना कर
शस्य-श्यामली की ज्योत्सना कर


हाँ तो श्रीमान
हमारे कद्रदान
अब सुनिए सीधी जुबान
हमारे यहां
तब गलियों में नालियाँ थी
अब नालियों मे गलियाँ हैं
विद्यालय में शौचालय नहीं था
अब शौचालय में विद्यालय है

एवरीडे की बती है
संकरे पथ से जाना है
ठंड से तड़प रहा बदन है
पापी पेट गा रहा गाना है ।।।
                             
  नीरज
                              प्रियदर्शी 

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