कुछ ना कहा उसने पर ,
सब बया कर दिया
कुछ ना किया उसने पर ,
सब सितम सह लिया !
कुछ ख्वाब थे देखे ..
थोड़ी चाहत थी दिल में
कुछ अरमान थे अभिलाषाए
थोड़ी अचरज थी दिल में ..
लड़कपन के थे जो सपने सुहाने ..
सायानी हुई ..सब बन गए बेगाने ..
जिंदगी की तार जब लगी गुनगुनाने ..
दुनिया की महफ़िल में हो गए कुछ अनजाने .
क्या पता था उसे जो ऐसा भी होगा .
अपनों की ही भीड़ में किसी ने पहना है चोगा .
क्या खता थी उसकी जो हुआ ये धोखा ..
आबरू के बाजार में व्यवहार ये अनोखा ..
थे अपने ही वो भी ..थी उनकी ही ये भी ..
था उसका वो "आह ".थी उनकी वो वाह ..
जब बे ~ आबरू ही हुई तोह कैसी ये अस्मत .
अब अपने उन दरिंदो का क्या ..जब हुई ना रहमत ..
अब उसके जीने में क्या था जो हम दुआ मांग रहे थे ..
जब उसके हर एक आह पर अखबार वाले सुर्खिया मांग रहे थे ..
साँसे भी थम गयी ..आँखे भी नम गयी ..
राजनीती की गर्मी में उसकी रूह जम गयी .
दुनिया की आपाधापी से अलविदा हो ली ..
अपनों की मारामारी से अब बहुत वो झेली ..
थी सोयी मगर वो जागते हुए .अनजानी लाचारी में पलते हुए ..
हम सोये मगर सोते रहे ..अनजानी सी चाहत में जलते हुए ..
कुछ कहा भी क्या हमसे किसी को कोसते हुए
क्यों कहती सब जानते हुए समझते हुए ..
उसका कुछ न कहना ही एक मिशाल है .
तब तो बहरे और गूंगे थे अब क्यों बवाल है .
उसकी मासूमियत में ढेरो सवाल थे ..वो तोह यु ही रही ..जिंदगी के जितने भी साल थे
अब किसकी बारी है ..किसकी तैयारी है ..
ये सरकार बेचारी या फिर हमारी लाचारी है ..
अब तक सोये थे पर अब जागने का नाटक दिखावा है ..
या मै हु या तुम हो या है ये व्यवस्था ..सब एक छलावा है ..
तुम्हारी हर शाम गुलज़ार हो .मेरी हर वाह में खुमार हो ..
थोडा और इंतजार कर लो एक और वहसीपन का ..अभी तोह थोड़े ही तैयार हो ..
मोमबतिया जलाओगे ..रैलियां करोगे ..
फिर से एक बाज़ार जुटा कर उस मासूम का लेख जोखा करोगे ..
सभाए करोगे ..आन्दोलन भी होगा ..
फिर से इसी व्यवस्था का वैसा ही सोखपन भी होगा ..
वो बेआबरू हुई क्या इस बात का इल्म है ..
तुम भी हो उन्ही अपनों का हिस्सा ..जरुर इसी बात की शर्म है
उसकी चिता जलाना ..पर अपनी लाज बचाकर ..उसको मालाये पहनआना पर अपनी ताज बचाकर
मै भी हु तुम भी हो वो नही तो क्या
उसकी आह तो है .उसकी चाह तो है अब वो नही तोह क्या .
कर लो शपथ यदि है अग्निपथ ..
बहेगा लहू चाहे होगे लथपथ
उसकी आह यूँ ही बेकार नही जाएगी
उसकी चाह यूँ ही हार नही पायेगी .. नीरज प्रियदर्शी
सब बया कर दिया
कुछ ना किया उसने पर ,
सब सितम सह लिया !
कुछ ख्वाब थे देखे ..
थोड़ी चाहत थी दिल में
कुछ अरमान थे अभिलाषाए
थोड़ी अचरज थी दिल में ..
लड़कपन के थे जो सपने सुहाने ..
सायानी हुई ..सब बन गए बेगाने ..
जिंदगी की तार जब लगी गुनगुनाने ..
दुनिया की महफ़िल में हो गए कुछ अनजाने .
क्या पता था उसे जो ऐसा भी होगा .
अपनों की ही भीड़ में किसी ने पहना है चोगा .
क्या खता थी उसकी जो हुआ ये धोखा ..
आबरू के बाजार में व्यवहार ये अनोखा ..
थे अपने ही वो भी ..थी उनकी ही ये भी ..
था उसका वो "आह ".थी उनकी वो वाह ..
जब बे ~ आबरू ही हुई तोह कैसी ये अस्मत .
अब अपने उन दरिंदो का क्या ..जब हुई ना रहमत ..
अब उसके जीने में क्या था जो हम दुआ मांग रहे थे ..
जब उसके हर एक आह पर अखबार वाले सुर्खिया मांग रहे थे ..
साँसे भी थम गयी ..आँखे भी नम गयी ..
राजनीती की गर्मी में उसकी रूह जम गयी .
दुनिया की आपाधापी से अलविदा हो ली ..
अपनों की मारामारी से अब बहुत वो झेली ..
थी सोयी मगर वो जागते हुए .अनजानी लाचारी में पलते हुए ..
हम सोये मगर सोते रहे ..अनजानी सी चाहत में जलते हुए ..
कुछ कहा भी क्या हमसे किसी को कोसते हुए
क्यों कहती सब जानते हुए समझते हुए ..
उसका कुछ न कहना ही एक मिशाल है .
तब तो बहरे और गूंगे थे अब क्यों बवाल है .
उसकी मासूमियत में ढेरो सवाल थे ..वो तोह यु ही रही ..जिंदगी के जितने भी साल थे
अब किसकी बारी है ..किसकी तैयारी है ..
ये सरकार बेचारी या फिर हमारी लाचारी है ..
अब तक सोये थे पर अब जागने का नाटक दिखावा है ..
या मै हु या तुम हो या है ये व्यवस्था ..सब एक छलावा है ..
तुम्हारी हर शाम गुलज़ार हो .मेरी हर वाह में खुमार हो ..
थोडा और इंतजार कर लो एक और वहसीपन का ..अभी तोह थोड़े ही तैयार हो ..
मोमबतिया जलाओगे ..रैलियां करोगे ..
फिर से एक बाज़ार जुटा कर उस मासूम का लेख जोखा करोगे ..
सभाए करोगे ..आन्दोलन भी होगा ..
फिर से इसी व्यवस्था का वैसा ही सोखपन भी होगा ..
वो बेआबरू हुई क्या इस बात का इल्म है ..
तुम भी हो उन्ही अपनों का हिस्सा ..जरुर इसी बात की शर्म है
उसकी चिता जलाना ..पर अपनी लाज बचाकर ..उसको मालाये पहनआना पर अपनी ताज बचाकर
मै भी हु तुम भी हो वो नही तो क्या
उसकी आह तो है .उसकी चाह तो है अब वो नही तोह क्या .
कर लो शपथ यदि है अग्निपथ ..
बहेगा लहू चाहे होगे लथपथ
उसकी आह यूँ ही बेकार नही जाएगी
उसकी चाह यूँ ही हार नही पायेगी .. नीरज प्रियदर्शी
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