पाटलीपुत्र की राजधानी पटना के गांधी मैदान की
रणभूमी मे राम और रावण के बीच हुए भीषण युद्ध में प्रयोग मे लाए गए विद्दुत जनीत
बाणों के मायावी मार से 33 नगरवासीयों की जान गयी। राम
की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस प्रकार के बाणों का प्रयोग रावण की सेना की तरफ से हुआ है। ब्रह्मा ने इस घटना
के जाँच की जिम्मेदारी अपने खास मताहतों को सौंप दी है।
शुक्रवार की शाम गांधी मैदान की रणभूमी मे जैसे
ही युद्भ की रणभेरी बजी नगरवासी अपने घरों से निकल कर रणक्षेत्र की ओर कूच करने
लगे। गौरतलब है कि नगरवासी इस युद्ध मे राम की तरफ से ल़डने का फैसला किये थे। राम के दल ने युद्ध मे
हौसला अफजाइ के लिए जनता को आमंत्रित भी किया था। पूरी तैयारी के साथ पहुँचे नगरवासीयों को तब यातनाएँ झेलनी पडी जब रणक्षेत्र के किसी
एक भाग में बिजली वाले बाणों के चलने की खबर प्राप्त हुई।
यद्दपि ये खबर बाद में कोरी
अफवाह साबित हुई तथापि लोगों के बीच अफरातफरी जैसा माहौल हो गया। नगरबासीयों को इस
बात का तनिक भी अंदेशा नहीं था कि युद्ध में ऐसे भी प्रयोग हो सकते हैं। ऐसी अफवाह
सुनने के बाद ये लाजमी था कि लोगों के बीच दहशत का माहौल बन गया। लोग एक दुसरे से
टकराने लगे,सबको रणक्षेत्र से बाहर जाने की जल्दी थी। ऐसे माहौल मे ये अक्सर देखा
जाता है कि बिना एक किसी की परबाह किए लोग स्वंय और अपने परिवार को बचाने में लग
जाते हैं। मानवीय भाव में भी कमी आ जाती है। ऐसे ही तबाही के आलम में 33 लोग अपनी
जान गँवा बैठे और दो दर्जन से ज्यादा जख्मी हो गये। बाद मे इस बात की पुष्टि हुई
कि ये महज एक अफवाह था बाकी कुछ नहीं।
गौर करने वाली बात ये है कि वहाँ इस
प्रकार के अफवाहों से निपटने के पुख्ता इंतजाम नहीं किये गये थे। जनता जो कि सिर्फ
एक दल का हौसला बढाने गई थी उसका क्या कसूर था कि उन्हें अपने प्राणों की आहुति
देनी पडी। आम जनता तो ये सोच कर गयी थी कि
वो जिस दल का हौसला अफजाइ करने जा रही है उनके प्राणों की रक्षा करेगा। क्या इस
प्रकार के घटिया इंतजाम की जिम्मेदारी राम के दल की नहीं है? प्रथम दृश्या तो यह स्पष्ट
होता है कि इस प्रकार की बदइंतजामी का सारा श्रेय राम के दल को ही जाता है। अब अगर
कोई जिम्मेदारियों से ही अपना पल्ला झाडने लगे तब तो सिर्फ एक ही आस बचती है,
न्याय के लिए गुहार। बहरहाल नगरवासीयों को न्याय मिलेगा या नहीं वक्त तय करेगा
परंतु एक बात तय है कि ऐसी घटनाओं को झेलने के लिए हमें कमर कस लेने की जरुरत है।
आगे भी इस प्रकार की घटनाएँ होंगी, प्रशासन की बेरुखी यही कहती है। घटना के बाद इस
प्रकार की खबरे भी निकल के आयीं कि “ राम रावण के युद्ध में 33
लोग शहीद हुए”। कृपया इस प्रकार की उपमाएँ देने से परहेज करें। ऐसी शहीदी क्या होती है जरा
उन पीडीतों से जानने का प्रयास किजीए। किसी ने अपनों को खो दिया है तो किसी के
सपने मिट्टी मे मिल गए। जरा उनमें खुद को रख कर देखिए सारी शहीदी हवा हो जाएगी।